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नहीं आपका आर्गुममेंट हो गया सर
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हमारे यहां स्कूल के सिलेबस में पंच
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परमेश्वर कहानी पढ़ाई जाती है प्रेमचंद जी
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की लिखी हुई आप निश्चिंत रहिए आपकी कोई
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राउंड मैं मिस नहीं होने दूंगा रिबर्टल का
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राउंड टू मुफ्ती शमाल नदी साहब
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असल में जो हकीकी प्रॉब्लम है असल
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प्रॉब्लम है वो ये है कि जावेद साहब के
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पास कांसेप्ट ऑफ गॉड क्लियर खैर नहीं है।
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इन्होंने कहा कि कायनात से पहले खुदा तो
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था तब भी तो टाइम होगा कि खुद कायनात टाइम
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कायनात का हिस्सा है। हम खुदा उस खुदा को
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मानते हैं नेसेसरी बीइंग का टाइमलेस होना
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जरूरी है। क्योंकि वो टाइम का क्रिएटर है।
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जब उसने टाइम को क्रिएट किया तो वो खुद
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टाइम पे कैसे होगा? उसने जब स्पेस को
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क्रिएट किया तो खुद स्पेस में कैसे होगा?
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अगर वो टाइम एंड स्पेस को पहले से ही उसका
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पाबंद है तो फिर किस चीज को उसने क्रिएट
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किया? लिहाजा ये सवाल गलत है के खुदा था
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तो टाइम होगा। बिल्कुल नहीं। टाइम के
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पाबंद हम है खुदा नहीं है। हम फिजिकल
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वर्ल्ड से ताल्लुक रखते हैं। वो
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मेटाफिजिकल रियलिटी है। दूसरी चीज
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इन्होंने मिसाल दी कि चाय की केतली हवा
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में घूम रही होगी और पता नहीं शायद वो
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बर्टन रसेल का उन्होंने हवाला दिया।
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बहरहाल यही प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम यही है
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कि हम चीजों के दरमियान डिफरेंशिएट नहीं
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कर पाते। ये जो आपने मिसाल दी ये
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इमेजिनेशन है और मैं जो साबित कर रहा हूं
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वो लॉजिकल नेसेसिटी है।
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आप इमेजिन करने आए तो कुछ भी करें। जुपिटर
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में पिंक एलीिफेंट होगा, यूनिकॉर्न होगा।
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करें उस उससे कायनात पे क्या फर्क पड़ता
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है? उससे आप लॉजिकल नेसेसिटी साबित नहीं
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कर सकते। मैं तो उस प्राइम कॉज की बात कर
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रहा हूं। उस नेसेसरी बीइंग की बात कर रहा
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हूं जिसके बगैर इस कायनात का एक्सिस्टेंस
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मुमकिन नहीं है। दूसरी चीज मजहब को साइंस
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चैलेंज करती है वगैरह वगैरह। ये हमारा
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टॉपिक ही नहीं है। मैं मैं इस पे बात
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करूंगा तो फिर मेरा वक्त चला जाएगा। मजहब
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के ऊपर क्योंकि हमारी डिस्कशन नहीं है।
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साइंस को मजहब और बिलखसूस मैं और हमारा
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वर्ल्ड व्यू कम से कम साइंस को पीछा नहीं
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पीछे नहीं करता है। साइंटिज्म की मजम्मत
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करता है। इसकी वजाहत मैंने पहले कर दी।
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दूसरी ची चीज इन्होंने कहा वर्ल्ड का
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नक्शा लीजिए। वर्ल्ड मैप लीजिए। दो
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अलग-अलग जगह की। हजरत मैंने ये होमवर्क
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किया था। और मैंने मिडिल ईस्ट मिडिल ईस्ट
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का एक नक्शा लिया और यूरोप का एक नक्शा
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लिया। ये मजहबी इलाका और ये अह लिबरल और
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एथ ईस्ट इलाका। मुझे पता चला कि सबसे
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ज्यादा रेप केसेस जो हैं वहां पर हैं।
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मुझे यह पता चला यूएन की रिपोर्ट के
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मुताबिक मैं अपने घर से नहीं ले आ रहा कि
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जो वर्किंग वुमेन है यूरोपियन कंट्रीज में
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वुमेन सेक्सुअल हरासमेंट का वर्क में
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शुमार। ये मिडिल ईस्ट में नहीं हो रहा है।
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वो मजहबी लोग हैं इसलिए नहीं हो रहा है।
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दूसरी चीज आपने ये कहा के मजहबी आदमी का
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अच्छा होना हमारे अच्छे होने से बहुत
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मुश्किल है। बहुत मुश्किल है। तो इसका
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मतलब ये है कि गॉड के अलावा आपके पास
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अच्छे और बुरे का कोई स्टैंडर्ड है। मैं
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चाहूंगा कि कन्वर्सेशनल स्टाइल वाली
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डिस्कशन और सेगमेंट पे इसी पे बात कर लेते
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हैं। थैंक यू वेरी मच।