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सबका खुलासा यह है कि ईशा का वक्त मगरिब
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के फ़ौरन बाद शुरू होता है। और सुबह सादिक
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तक बाकी रहता है। और यह जो पूरा वक्त है,
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इसको तीन हिस्सों में बांटा गया है। और
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पहली एक तिहाई में नमाज़ पढ़ना मुस्तहब है।
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दूसरी तिहाई में यानी आधी रात तक नमाज़
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पढ़ना जायज है। उसके बाद जाइस के बाद मरू