Maulana Saad Kandhlawi Sahab Powerful Bayan | Puinan Hooghly Biswa Ijtema | #maulanasaadkandhalvi
Jan 11, 2026
Puinan Hooghly Biswa Ijtema | Powerful Bayan by Maulana Saad Kandhlawi Sahab
پُوئنان، ہوگلی بِسوا اجتماع | مولانا سعد کندھلوی صاحب کا ایمان افروز بیان
पुइनान, हुगली बिस्वा इज्तेमा | मौलाना साद कंधलवी साहब का असरदार बयान
Puinan Hooghly Biswa Ijtema | Maulana Saad Kandhlawi Sahab Ka Powerful Bayan
পুইনান, হুগলি বিশ্ব ইজতেমা | মাওলানা সাদ কান্ধলভী সাহেবের হৃদয়স্পর্শী বয়ান
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📝 Description
🔹 Urdu
یہ بیان پُوئنان، ہوگلی میں منعقد ہونے والے عظیم بِسوا اجتماع میں دیا گیا ہے۔
مولانا سعد کندھلوی صاحب نے اس بیان میں ایمان، اصلاحِ امت، دعوت اور فکرِ آخرت پر نہایت مؤثر انداز میں روشنی ڈالی ہے۔
یہ بیان ہر مسلمان کے لیے سننا نہایت ضروری ہے۔
آخر تک ضرور سنیں اور دوسروں تک بھی پہنچائیں۔
🔹 Hindi
यह बयान पुइनान, हुगली में आयोजित बिस्वा इज्तेमा में दिया गया ہے।
मौलाना साद कंधलवी साहब ने ईमान, दीन, दावत और आखिरत की फिक्र पर दिल को छू लेने वाला बयान फरमाया है।
पूरा बयान जरूर सुनें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें।
🔹 Hinglish
Yeh bayan Puinan Hooghly ke Biswa Ijtema mein diya gaya hai.
Maulana Saad Kandhlawi Sahab ne is bayan mein iman, deen, daawat aur aakhirat ki fikr par bahut hi asardaar baat ki hai.
Video ko end tak zaroor dekhein aur share karein.
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0:00
इबने आदिया का बड़ा दर्जा था अल्लामा सुती
0:02
के उन्होंने आखिर से दरख्वास्त की कि आप
0:05
मेरा काम करा जाए आपका एहसान होगा अल्लामा
0:08
सुती ने फरमाया से मैं आपके पास से इंकार
0:10
ना करता और मैं आपके काम से हुजूर ना करता
0:13
मैं जरूर चला जाता लेकिन मैं माज़त चाहता
0:16
हूं यानी बादशाह के दरबार में आपकी
0:18
सिफारिश के लिए नहीं जा सकता ये क्या बात
0:20
है
0:22
इबने फरमाते हैं पूछा क्या हरज है अल्लामा
0:26
ने फरमाया अगर मैं एक मर्तबा बादशाह के
0:28
दरबार में चला गया
0:30
तो मैं 70 मर्तबा से ज्यादा मोहम्मद
0:34
सल्लल् की जियारत बगैर नींद के बगैर बगैर
0:38
ख्वाब के कर चुका हूं। मैं अगर एक मर्तबा
0:41
दरबार में चला गया। मुझे इस बात का खतरा
0:43
है कि ये जियारत का सिलसिला खत्म हो
0:45
जाएगा।
0:48
ये अल्लामा सिती ने ये माज़रत की अिया को
0:54
कि अगर मैं एक मर्तबा चला गया बादशाह के
0:56
दरबार में की जियारत और आपकी मजलिस का जो
1:00
सिलसिला चल रहा है मेरा ये सिलसिला खत्म
1:02
हो जाएगा मैं माज़त चाहता हूं इसलिए मैं
1:05
नहीं जा सकता
1:09
आप ज्यादा जानते हैं माशा्लाह बढ़े और
1:12
वाकयात का भी आपको रिश्तेदार होगा
1:16
लेकिन इस चीज़ की जरूरत है
1:22
इससे
1:30
क्योंकि इंसान की फितरत से आप जिसकी जिसकी
1:33
चीज़ से आप मुस्तखनी हो जाएंगे वो आपकी चीज़
1:35
का हो जाएगा।
1:39
सलाम की एक बुनियाद है
1:44
मैं कहता हूं ना अंबिया की बैसत का सबसे
1:47
बुनियादी मकसद तालीम है
1:50
सबसे बुनियादी मकसद तालीम ही नबियों की
1:52
बहत का मकसद है उस तालीम के साथ उनका ऐलान
1:56
ये है लाज
2:00
मुझे देनी चाहिए माल नहीं चाहिए
2:04
तो मैंने अ किया के
2:06
ये एक बुनियादी चीज
2:09
माल से मालदारों से इस्तगना
2:13
माल से ईमानदारों से इस्तगना और उस
2:16
इस्तगना को बाकी रखने के लिए हुकुम दिया
2:18
गया था
2:21
इमाम मालिक रहमत फरमाते थे
2:26
के अपने उलमा को फुनून सिखलाओ
2:29
अपने उलमा कोून सिखलाओ
2:32
अपने उलमा को फुनून सिखलाओ अगर तुमने ऐसा
2:35
ना किया तो मुझे अंदेशा है कि इस्लाम को
2:38
भेज देंगे।
2:42
मुझे अंदेशा के इस्लाम को भेज देंगे।
2:46
ये गालिबन इमाम मालिक का इमाम इन दोनों
2:49
में से किसी एक का कॉल ये मुझे इंतजार
2:52
नहीं हो रहा है। इन दोनों में से यकीनन
2:54
किसी एक का कॉल ये है कि अपने उलमा को
2:56
सुनून सिखलाओ। अपने उलमा को सुनून सिखलाओ
2:59
ताकि ये
3:01
अपने इस्ला इस इस्लाम को बेच ना दें।
3:05
इसना के लिए उन के सीखने का हुक्म दिया था
3:09
कि यह अपनी जरियात में अपने गैर से नहीं
3:15
तो हमने अ किया
3:17
एक बुनियादी चीज़ है।
3:20
एक बुनियादी चीज़ है।
3:23
उलमा में इस्तगना हो।
3:26
उलमा में इस्तगना हो। यह एक बुनियादी चीज़
3:29
है। इसी आवाम के अंदर उलमा की वक़ात और की
3:33
तरह पैदा हो गई।
3:38
दूसरी बात ये है
3:40
दूसरी अहम बात ये है
3:45
के असल तालीम का जो उसूल है और तालीम का
3:49
जो बुनियादी शर्त है तालीम के लिए जो
3:50
बुनियादी शर्त शर्त के दर्जे में कह रहा
3:52
हूं वो शर्त ये है केिम
3:56
और मुालिम
3:57
इनके दरमियान इलाफात होत
4:03
और इलाफ
4:06
इसलिए के आपको शायद बुरा लगेगा
4:11
और बुरा इसलिए लगेगा कि बात को के मुराद
4:14
तक नहीं पहुंचेंगे इसलिए बुरा लगेगा आपको
4:17
इल्म को लिख कर भेज देना
4:20
तरसी
4:23
तरसी इल्म के साथ नहीं है इल्म के साथ
4:26
तबली
4:29
इल्म के साथ तब्ली का लसील
4:34
नहीं
4:36
तरसील जो है वो सोबत और इख्तलाफ में माने
4:41
है तरसील सोबत और इला साहब माने
4:48
तरसील सोहबत और इलाकात को खत्म कर रही है
4:51
जो असल शर्त है तालीम के लिए
4:55
उसको तरसी दिल और आलात ने इस सोहबत की
4:59
शर्त को खत्म कर दिया है। ये मैं इस जमाने
5:02
का अलमिया और हादसा समझता हूं।
5:06
जिसको आप सहूलत का नाम देते हैं मैं उसको
5:08
नूसत का नाम देता हूं।
5:13
और जिसको आप तंगी का नाम और तंग नज़री का
5:16
नाम देते हैं। मैं उसको इबा सुन्नत कहता
5:18
हूं।
5:19
आप इसको तंगी कहते हैं। मैं इसको इबा
5:21
सुन्नत कहता हूं।
5:24
पहली शर्त सोबत
5:27
अगर सोबत नहीं है मैं कहता हूं कि सोबत
5:30
नहीं है तो खुदा की कसम तालीम नहीं है हां
5:33
मालूमात नशर हो रही है मालूमात तक पहुंच
5:35
रही है
5:37
सोबत है असल सोबत है क्योंकि तालीम का कोई
5:40
तसवुर नहीं है तरबियत के बगैर
5:43
इस तरबियत का ताल्लुक सोबत से है
5:47
अगर सोबत नहीं है तो कोई तालीम नहीं
5:51
तो हालात में
5:54
इनाबत को ज़बा कर दिया।
5:57
मेरी बात तवज्जो चाहता हूं। हालात ने
6:00
इनाबत को ज़बा कर दिया है। और हालात ने
6:04
हिजरत को रोक दिया है।
6:06
अब आपको आने की जरूरत नहीं है। इल्म आपके
6:08
पास आ जाएगा।
6:11
इल्म को किसी जरिए से अपने पास मंगवाना ये
6:14
तकब्बुर की अलामत है।
6:19
या तो आ नहीं सकते। हम आपके पास नहीं
6:21
सकते।
6:23
मैं तो हैरान हूं कि आपको इल्म को आला से
6:28
भेजने में क्यों नजर नहीं आ रहा है। जबकि
6:31
इमाम मालिक का कौल ये है कि अगर कोई आलिम
6:34
को अपने यहां बुलाता है ये कह कर कि आप
6:37
आकर मुझे हदीस पढ़ा दीजिए तो ये भी उसके
6:39
अंदर तकुर की अलामत है। आप मेरी बात पे
6:42
तवज्जो
6:46
आप तो आलात बाततिल से इल्म की तरफील को
6:48
जरूरत कह रहे हैं। और इमाम मालिक
6:51
रहमतुल्लाह अल खुद जाकर खलीफा हार रशीद को
6:54
हदीस इमाम मालिक ने इमाम मौका इमाम मालिक
6:57
मुकम्मल कर लिए खलीफा रशीद जमाने में
7:00
आए तो इन्होंने इमाम मालिक के पास ये
7:03
पैगाम भेजा पैगाम क्या भेजा तो वज़र को
7:05
भेजा जाफर बरमकी को कि जाओ इमाम साहब से
7:07
कहो कि मैं इल्म हदीस सीखना सुनना चाहता
7:10
हूं और वो किताब लेकर आए मुझे आकर हदीस
7:12
सुनाए इमाम मालिक ने जवाब दिया जाफर बरमकी
7:15
को कहते जाकर बादशाह से
7:18
इल्म चढ़कर किसी के पास नहीं इल्म के लिए
7:20
चल कर आया जाता है। इमाम मालिक की ये बात
7:23
कह कर वज़र को वापस कर दिया। खुद पीछे पीछे
7:26
आए। किताब नहीं लेकर आए। अकेला एक अकेले
7:29
खाली हाथ आए। पहुंचे खलीफा के पास। खलीफा
7:33
ने पूछा किताब लाए हो। इमाम फरमाया
7:36
तुम्हें तुम्हें शर्म नहीं आती?
7:39
इस इल्म को जिब्राइल 5ज़ साल के मसाफत से
7:43
लेकर आए हैं। तुम यहां बैठकर कहते हो अपने
7:44
महल में ये किताब लाकर मुझे हदीस सुनाओ
7:47
महल में।
7:49
तुम्हें शर्म नहीं आती
7:52
उस पर इमाम मालिक रहमतुल्लाह ने एक सन से
7:54
रिवायत अजीबोरीब एक समय से
7:59
इसमें एक सबी है सिर्फ
8:02
साबित
8:04
कहते साबित कहते हैं आप सा के पास बैठा
8:07
हुआ था ये उसी वक्त की रिवायत इमाम मालिक
8:09
ने जिस वक्त बादशाह ने ये कहा कि आपको
8:11
मैंने बुलाया था किताब जिक्र की
8:14
इमाम अली ने फरमाया
8:17
किसी मिसाली से बयान करते हैं कि मैं आप
8:20
ससल्लम के बराबर में बैठा हुआ था और आपकी
8:23
रान आपके घुटने का थोड़ा सा हिस्सा मेरी
8:26
रान से लगा हुआ था
8:29
बैठे कोई आदमी तो उसकी रान उनकी रान पर आप
8:33
का घुटने ऐसे टिका हुआ था
8:38
तो कहते हैं कि आप सल्लम पर एक टुकड़ा आयत
8:40
का छोटा सा नाजिल हुआ इसमें अल्लाह के
8:44
रास्ते में निकलने वालों में बीमारों का
8:48
इस्तना किया गया है।
8:51
मसाजिद को मसाइल के हलकों से आबाद करना
8:54
असल असल असल जो असल जो काम है इल्म का जो
8:57
फरीजा है वो फरीजा इलाज का फरीजा है जिसको
9:00
आला तो जरा ने ख़ कर दिया
9:03
उलमा फ़
9:06
मैं इस बात से हैरान हूं
9:08
उलमा की अक्सरियत पढ़ाती नहीं है अक्सरियत
9:11
नहीं पढ़ाती
9:13
ये पढ़ा कर माच में लग गए
9:16
मैं एक सफर में था एक मुल्क में एयरपोर्ट
9:19
पर बैठा हुआ था जहाज के इंतजार में तो एक
9:22
साहब आए जो एयरपोर्ट पे लिबास पहने हुए
9:26
थे। पेंट शर्ट पहने हुए थे और
9:30
वो आए आकर उन्होंने मेरी मेरे साथ की
9:32
कपड़े से और कुछ खाना रखा जा लाके।
9:37
लेकिन मैं उसका चेहरा देख रहा था। मुझे
9:39
उसके चेहरे में इल्म का नूर महसूस हुआ।
9:41
मैंने कहा हो ना हो इसने मदरसे में पढ़ा।
9:44
मैंने बेतल सवाल कर दिया के कौन से फरा है
9:49
वो ताजुब से मुझे देखने लगा बैठ गया मेरे
9:51
पास कहा आप ये सवाल क्यों कर रहे हैं
9:53
मैंने कहा मैं सवाल इसलिए कर रहा हूं कि
9:54
मुझे तसल्ली नहीं हो रही है मैं आपको आपका
9:56
चेहरा देखकर मुझे लगता है कि आप आलिम है
10:01
उसने बताया जी बेशक मैं फला मदरसे फार हूं
10:03
और ये जो मैंने किताबें पढ़ी है यहां तक
10:05
उसने बताया कि मेरा नतीजा साल का मेरे
10:09
मदरसे में कोई मुझसे आगे कभी बढ़ा नहीं है
10:12
इस दर्जे का लेकिन मुझे होकर घर आया तो घर
10:15
के हालात मैंने देखे उसमें माश की जरूरत
10:17
थी तो मैंने मशरा किया मेरा एक दोस्त यहां
10:20
इस मुल्क में एयरपोर्ट पर मुलाजिम था उसने
10:21
मुझे कहा तुम यहां आ जाओ मैं तुम्हें यहां
10:23
दिलवा देता हूं वो मैं यहां आ गया यहां
10:25
मैं छ साल आठ साल कितने बताया उसने कितने
10:28
साल से मैं यहां मुलाजिम हूं
10:31
आप मुझे कोई डॉक्टर दुनिया का ऐसा पेश कर
10:34
दें जिसने 15 साल डॉक्टरी पीढ़ी हो अपना
10:36
पैसा खर्च करके और वो डॉक्टरी छोड़ कर
10:38
कहीं कहीं जो है खेती कर रहा हो दिखला
10:40
दिया
10:43
सोचिए
10:46
मुझे कहना ये है कि उलमा अपने इल्म को
10:49
जाहिर करें।
10:51
उलमा अपने इल्म को जाहिर करें।
10:54
इमाम ने बाप कायम किया है इस पर बाकायदा
10:57
कि उलमा को चाहिए कि अपने इल्म को जाहिर
10:59
करें।
11:01
अपने इल्म को जाहिर करना उलमा के जिम्मे
11:03
उस पानी रखने वाले से भी ज्यादा अहम फरीजा
11:05
है। जो पानी लेकर किसी सेहरा से गुजर रहा
11:08
हो और वहां लोग प्यासे पड़े हो। पिया से
11:09
खबर नहीं इसके पास पानी है और इसे खबर
11:11
नहीं कि पानी की तलब है उससे ज्यादा जालिम
11:15
आदमी है जिसको अल्लाह ने इल्म दिया हो और
11:17
उसके पड़ोस में लोग उसे आलिम ना समझते हो
11:19
या उससे भी इसा ना करते हो
11:23
जी
11:25
एक सुबह जाना हुआ मैंने पूछा के यहां
11:28
माशा्लाह उलमा कितने पढ़ाते हैं कहने लगे
11:29
जी 30स पढ़ाते हैं आपकी 70% करते हैं
11:33
इसलिए के मैं फिर अर्ज करता हूं कि जितनी
11:36
आप मैं कहता हूं दावे से कहता हूं आप मुझे
11:38
याद करेंगे
11:39
जितनी आप सहलत देते जाएंगे मैं कहता हूं
11:42
के उलमा इतने ही तालीम से होते चले जाएंगे
11:45
इनका कोई सवाल ही नहीं होगा
11:50
इसलिए हम एक बुनियादी बात है तब्लीग का
11:52
असल मकसद ही तालीम है उलमा के नफर का खुदा
11:55
की कसम असल मकसद ही तालीम के निजाम को वसत
11:58
देना है
12:00
मकसद ही सनी है निजाम तालीम को वसत देनी
12:03
है इसमें कोई हरकत है क्योंकि नफर का
12:06
रिश्ता तालीम के साथ से कहीं ज्यादा
12:08
ज्यादा बड़ा हुआ है। नफ़ का रिश्ता तालीम के
12:12
साथ से कहीं ज्यादा बड़ा हुआ है।
12:15
आपने एक आरिस परज़ के फ़ज़ाइल को जो महील कर
12:19
दिया और महदूस कर दिया।
12:21
उसका नुकसान ये हुआ। तो जहन इदाद अकायद का
12:25
फसाद उसकी वजह ये है। उसकी वजह असल है।
12:32
इसलिए हम अर्ज करते हैं। असल चीज इस पर
12:35
गौर किया गया नफर का जो असल मकसद था वो
12:38
तालीम है कुरान पढ़िए आप आपको साथ मिलेगा
12:41
कुरान में
12:46
इस आयत से मालूम होता है कि नफर का गहरा
12:48
रिश्ता तालीम के साथ है क्योंकि ये नबी
12:50
कीत का असल मकसद है तालीम आप खुद तालीम
12:53
दीजिए
12:55
और ये बात नहीं है के हमसे पूछेगा तो हम
12:57
मसला बतलाएंगे मैं कहता हूं आपसे साहिल से
12:59
साहिल से इल्म का छुपाना जितना हराम है
13:01
गैर साहिल से भी इल्म का छुपाना हराम है
13:05
जमाने इल्म साहिल से जमाने इल्म साहब
13:08
सिर्फ़ साहिल से नहीं
13:11
गैर साहिल से कतमाने इल्म भी इसी तरह
13:14
ताजिरे हुकूबत का सबब है जिस तरह साहिल से
13:18
इल्म को छुपाना हराम है। हम बहुत बड़ी बात
13:22
कर रहे हैं। आपसे खाली पूछते नहीं है। आप
13:24
कहते हैं पूछते नहीं हम क्या बताएं? आप ये
13:26
पूछिए हमसे आकर। नहीं मैं कहता हूं कि ये
13:29
ना नबूवत का मिजाज ना सहाबा का मिजाज। साफ़
13:30
साफ़ बात है।
13:33
उलमा का या ख़्याल के लोग हमसे पूछते नहीं
13:35
है। क्यों आपका ख्याल यह है कि लोग हमसे
13:37
पूछते नहीं है। आपकी जिम्मेदारी है कि आप
13:39
पूछने वाले तैयार कीजिए। ये सुन्नत है।
13:43
क्यों आप सल्लम हज़ मनास मनासु क्यों? आप
13:47
क्यों नहीं फरमा रहे? जिसे पूछना होगा वो
13:48
पूछ लेगा। मुस्तफ़ी पैदा करना मुफ़्ती के
13:51
जिम्मे है। मुस्तफ़ी पैदा करना मुफ़्ती के
13:55
जिम्मे है। मुफ़्ती के जिम्मे मुस्तफ़ी
13:56
तैयार करना। आस निकल कर शाख को हिलाया।
13:58
फिर हिलाया फिर हिलाया। मशहूर रिवायत है
14:00
पर उसके दरख्त के पत्ते झड़ने लगे फरमाया
14:02
मुझसे अनस पूछते क्यों नहीं हो मैं ऐसा
14:03
क्यों कर रहा हूं उछालते क्यों कर रहे हैं
14:04
आपने फरमाया के जब कोई अच्छी तरह वजू करके
14:06
अच्छी तरह पढ़ता है उसको ऐसे झड़ते हैं
14:08
सहाबी ने इस रिवायत को नकल करने के लिए
14:10
सिर्फ हदीस को नकल नहीं किया बल्कि बाद
14:12
वाले को बुलाकर लाए दरख्त के पास दरख्त की
14:14
टहनी को हिलाया हिला कर पत्ते जब झड़ने
14:16
लगे तो सवाल किया पूछते क्यों नहीं हो
14:18
क्यों कर रहे हो कि सारी बात आप माशा्लाह
14:20
रिवायत आप जानते हैं इस रिवायत से मालूम
14:21
होता है कि आप सल्ला वसल्लम के दर्जे
14:23
तालीम की सहाबा ने इस तरह हिफाजत की है
14:25
किसी रिवायत को नकल नहीं किया बल्कि
14:27
रिवायत के नकल करने में पूरा अमली तौर पर
14:30
दरख्त की टहनी हिला करी ने बाद वाले को
14:32
बतलाई कि देखो आज इस तरह किया था मैं भी
14:34
इस तरह कर रहा हूं मुस्तकी पैदा करो
14:38
मुस्तख मुस्तख तैयार करो हां।

