0:00
इबने आदिया का बड़ा दर्जा था अल्लामा सुती
0:02
के उन्होंने आखिर से दरख्वास्त की कि आप
0:05
मेरा काम करा जाए आपका एहसान होगा अल्लामा
0:08
सुती ने फरमाया से मैं आपके पास से इंकार
0:10
ना करता और मैं आपके काम से हुजूर ना करता
0:13
मैं जरूर चला जाता लेकिन मैं माज़त चाहता
0:16
हूं यानी बादशाह के दरबार में आपकी
0:18
सिफारिश के लिए नहीं जा सकता ये क्या बात
0:22
इबने फरमाते हैं पूछा क्या हरज है अल्लामा
0:26
ने फरमाया अगर मैं एक मर्तबा बादशाह के
0:30
तो मैं 70 मर्तबा से ज्यादा मोहम्मद
0:34
सल्लल् की जियारत बगैर नींद के बगैर बगैर
0:38
ख्वाब के कर चुका हूं। मैं अगर एक मर्तबा
0:41
दरबार में चला गया। मुझे इस बात का खतरा
0:43
है कि ये जियारत का सिलसिला खत्म हो
0:48
ये अल्लामा सिती ने ये माज़रत की अिया को
0:54
कि अगर मैं एक मर्तबा चला गया बादशाह के
0:56
दरबार में की जियारत और आपकी मजलिस का जो
1:00
सिलसिला चल रहा है मेरा ये सिलसिला खत्म
1:02
हो जाएगा मैं माज़त चाहता हूं इसलिए मैं
1:09
आप ज्यादा जानते हैं माशा्लाह बढ़े और
1:12
वाकयात का भी आपको रिश्तेदार होगा
1:16
लेकिन इस चीज़ की जरूरत है
1:30
क्योंकि इंसान की फितरत से आप जिसकी जिसकी
1:33
चीज़ से आप मुस्तखनी हो जाएंगे वो आपकी चीज़
1:39
सलाम की एक बुनियाद है
1:44
मैं कहता हूं ना अंबिया की बैसत का सबसे
1:47
बुनियादी मकसद तालीम है
1:50
सबसे बुनियादी मकसद तालीम ही नबियों की
1:52
बहत का मकसद है उस तालीम के साथ उनका ऐलान
2:00
मुझे देनी चाहिए माल नहीं चाहिए
2:09
माल से मालदारों से इस्तगना
2:13
माल से ईमानदारों से इस्तगना और उस
2:16
इस्तगना को बाकी रखने के लिए हुकुम दिया
2:21
इमाम मालिक रहमत फरमाते थे
2:26
के अपने उलमा को फुनून सिखलाओ
2:29
अपने उलमा कोून सिखलाओ
2:32
अपने उलमा को फुनून सिखलाओ अगर तुमने ऐसा
2:35
ना किया तो मुझे अंदेशा है कि इस्लाम को
2:42
मुझे अंदेशा के इस्लाम को भेज देंगे।
2:46
ये गालिबन इमाम मालिक का इमाम इन दोनों
2:49
में से किसी एक का कॉल ये मुझे इंतजार
2:52
नहीं हो रहा है। इन दोनों में से यकीनन
2:54
किसी एक का कॉल ये है कि अपने उलमा को
2:56
सुनून सिखलाओ। अपने उलमा को सुनून सिखलाओ
3:01
अपने इस्ला इस इस्लाम को बेच ना दें।
3:05
इसना के लिए उन के सीखने का हुक्म दिया था
3:09
कि यह अपनी जरियात में अपने गैर से नहीं
3:26
उलमा में इस्तगना हो। यह एक बुनियादी चीज़
3:29
है। इसी आवाम के अंदर उलमा की वक़ात और की
3:45
के असल तालीम का जो उसूल है और तालीम का
3:49
जो बुनियादी शर्त है तालीम के लिए जो
3:50
बुनियादी शर्त शर्त के दर्जे में कह रहा
3:52
हूं वो शर्त ये है केिम
3:57
इनके दरमियान इलाफात होत
4:06
इसलिए के आपको शायद बुरा लगेगा
4:11
और बुरा इसलिए लगेगा कि बात को के मुराद
4:14
तक नहीं पहुंचेंगे इसलिए बुरा लगेगा आपको
4:17
इल्म को लिख कर भेज देना
4:23
तरसी इल्म के साथ नहीं है इल्म के साथ
4:29
इल्म के साथ तब्ली का लसील
4:36
तरसील जो है वो सोबत और इख्तलाफ में माने
4:41
है तरसील सोबत और इला साहब माने
4:48
तरसील सोहबत और इलाकात को खत्म कर रही है
4:51
जो असल शर्त है तालीम के लिए
4:55
उसको तरसी दिल और आलात ने इस सोहबत की
4:59
शर्त को खत्म कर दिया है। ये मैं इस जमाने
5:02
का अलमिया और हादसा समझता हूं।
5:06
जिसको आप सहूलत का नाम देते हैं मैं उसको
5:08
नूसत का नाम देता हूं।
5:13
और जिसको आप तंगी का नाम और तंग नज़री का
5:16
नाम देते हैं। मैं उसको इबा सुन्नत कहता
5:19
आप इसको तंगी कहते हैं। मैं इसको इबा
5:27
अगर सोबत नहीं है मैं कहता हूं कि सोबत
5:30
नहीं है तो खुदा की कसम तालीम नहीं है हां
5:33
मालूमात नशर हो रही है मालूमात तक पहुंच
5:37
सोबत है असल सोबत है क्योंकि तालीम का कोई
5:40
तसवुर नहीं है तरबियत के बगैर
5:43
इस तरबियत का ताल्लुक सोबत से है
5:47
अगर सोबत नहीं है तो कोई तालीम नहीं
5:54
इनाबत को ज़बा कर दिया।
5:57
मेरी बात तवज्जो चाहता हूं। हालात ने
6:00
इनाबत को ज़बा कर दिया है। और हालात ने
6:04
हिजरत को रोक दिया है।
6:06
अब आपको आने की जरूरत नहीं है। इल्म आपके
6:11
इल्म को किसी जरिए से अपने पास मंगवाना ये
6:19
या तो आ नहीं सकते। हम आपके पास नहीं
6:23
मैं तो हैरान हूं कि आपको इल्म को आला से
6:28
भेजने में क्यों नजर नहीं आ रहा है। जबकि
6:31
इमाम मालिक का कौल ये है कि अगर कोई आलिम
6:34
को अपने यहां बुलाता है ये कह कर कि आप
6:37
आकर मुझे हदीस पढ़ा दीजिए तो ये भी उसके
6:39
अंदर तकुर की अलामत है। आप मेरी बात पे
6:46
आप तो आलात बाततिल से इल्म की तरफील को
6:48
जरूरत कह रहे हैं। और इमाम मालिक
6:51
रहमतुल्लाह अल खुद जाकर खलीफा हार रशीद को
6:54
हदीस इमाम मालिक ने इमाम मौका इमाम मालिक
6:57
मुकम्मल कर लिए खलीफा रशीद जमाने में
7:00
आए तो इन्होंने इमाम मालिक के पास ये
7:03
पैगाम भेजा पैगाम क्या भेजा तो वज़र को
7:05
भेजा जाफर बरमकी को कि जाओ इमाम साहब से
7:07
कहो कि मैं इल्म हदीस सीखना सुनना चाहता
7:10
हूं और वो किताब लेकर आए मुझे आकर हदीस
7:12
सुनाए इमाम मालिक ने जवाब दिया जाफर बरमकी
7:15
को कहते जाकर बादशाह से
7:18
इल्म चढ़कर किसी के पास नहीं इल्म के लिए
7:20
चल कर आया जाता है। इमाम मालिक की ये बात
7:23
कह कर वज़र को वापस कर दिया। खुद पीछे पीछे
7:26
आए। किताब नहीं लेकर आए। अकेला एक अकेले
7:29
खाली हाथ आए। पहुंचे खलीफा के पास। खलीफा
7:33
ने पूछा किताब लाए हो। इमाम फरमाया
7:36
तुम्हें तुम्हें शर्म नहीं आती?
7:39
इस इल्म को जिब्राइल 5ज़ साल के मसाफत से
7:43
लेकर आए हैं। तुम यहां बैठकर कहते हो अपने
7:44
महल में ये किताब लाकर मुझे हदीस सुनाओ
7:49
तुम्हें शर्म नहीं आती
7:52
उस पर इमाम मालिक रहमतुल्लाह ने एक सन से
7:54
रिवायत अजीबोरीब एक समय से
7:59
इसमें एक सबी है सिर्फ
8:04
कहते साबित कहते हैं आप सा के पास बैठा
8:07
हुआ था ये उसी वक्त की रिवायत इमाम मालिक
8:09
ने जिस वक्त बादशाह ने ये कहा कि आपको
8:11
मैंने बुलाया था किताब जिक्र की
8:17
किसी मिसाली से बयान करते हैं कि मैं आप
8:20
ससल्लम के बराबर में बैठा हुआ था और आपकी
8:23
रान आपके घुटने का थोड़ा सा हिस्सा मेरी
8:29
बैठे कोई आदमी तो उसकी रान उनकी रान पर आप
8:33
का घुटने ऐसे टिका हुआ था
8:38
तो कहते हैं कि आप सल्लम पर एक टुकड़ा आयत
8:40
का छोटा सा नाजिल हुआ इसमें अल्लाह के
8:44
रास्ते में निकलने वालों में बीमारों का
8:51
मसाजिद को मसाइल के हलकों से आबाद करना
8:54
असल असल असल जो असल जो काम है इल्म का जो
8:57
फरीजा है वो फरीजा इलाज का फरीजा है जिसको
9:00
आला तो जरा ने ख़ कर दिया
9:06
मैं इस बात से हैरान हूं
9:08
उलमा की अक्सरियत पढ़ाती नहीं है अक्सरियत
9:13
ये पढ़ा कर माच में लग गए
9:16
मैं एक सफर में था एक मुल्क में एयरपोर्ट
9:19
पर बैठा हुआ था जहाज के इंतजार में तो एक
9:22
साहब आए जो एयरपोर्ट पे लिबास पहने हुए
9:26
थे। पेंट शर्ट पहने हुए थे और
9:30
वो आए आकर उन्होंने मेरी मेरे साथ की
9:32
कपड़े से और कुछ खाना रखा जा लाके।
9:37
लेकिन मैं उसका चेहरा देख रहा था। मुझे
9:39
उसके चेहरे में इल्म का नूर महसूस हुआ।
9:41
मैंने कहा हो ना हो इसने मदरसे में पढ़ा।
9:44
मैंने बेतल सवाल कर दिया के कौन से फरा है
9:49
वो ताजुब से मुझे देखने लगा बैठ गया मेरे
9:51
पास कहा आप ये सवाल क्यों कर रहे हैं
9:53
मैंने कहा मैं सवाल इसलिए कर रहा हूं कि
9:54
मुझे तसल्ली नहीं हो रही है मैं आपको आपका
9:56
चेहरा देखकर मुझे लगता है कि आप आलिम है
10:01
उसने बताया जी बेशक मैं फला मदरसे फार हूं
10:03
और ये जो मैंने किताबें पढ़ी है यहां तक
10:05
उसने बताया कि मेरा नतीजा साल का मेरे
10:09
मदरसे में कोई मुझसे आगे कभी बढ़ा नहीं है
10:12
इस दर्जे का लेकिन मुझे होकर घर आया तो घर
10:15
के हालात मैंने देखे उसमें माश की जरूरत
10:17
थी तो मैंने मशरा किया मेरा एक दोस्त यहां
10:20
इस मुल्क में एयरपोर्ट पर मुलाजिम था उसने
10:21
मुझे कहा तुम यहां आ जाओ मैं तुम्हें यहां
10:23
दिलवा देता हूं वो मैं यहां आ गया यहां
10:25
मैं छ साल आठ साल कितने बताया उसने कितने
10:28
साल से मैं यहां मुलाजिम हूं
10:31
आप मुझे कोई डॉक्टर दुनिया का ऐसा पेश कर
10:34
दें जिसने 15 साल डॉक्टरी पीढ़ी हो अपना
10:36
पैसा खर्च करके और वो डॉक्टरी छोड़ कर
10:38
कहीं कहीं जो है खेती कर रहा हो दिखला
10:46
मुझे कहना ये है कि उलमा अपने इल्म को
10:51
उलमा अपने इल्म को जाहिर करें।
10:54
इमाम ने बाप कायम किया है इस पर बाकायदा
10:57
कि उलमा को चाहिए कि अपने इल्म को जाहिर
11:01
अपने इल्म को जाहिर करना उलमा के जिम्मे
11:03
उस पानी रखने वाले से भी ज्यादा अहम फरीजा
11:05
है। जो पानी लेकर किसी सेहरा से गुजर रहा
11:08
हो और वहां लोग प्यासे पड़े हो। पिया से
11:09
खबर नहीं इसके पास पानी है और इसे खबर
11:11
नहीं कि पानी की तलब है उससे ज्यादा जालिम
11:15
आदमी है जिसको अल्लाह ने इल्म दिया हो और
11:17
उसके पड़ोस में लोग उसे आलिम ना समझते हो
11:19
या उससे भी इसा ना करते हो
11:25
एक सुबह जाना हुआ मैंने पूछा के यहां
11:28
माशा्लाह उलमा कितने पढ़ाते हैं कहने लगे
11:29
जी 30स पढ़ाते हैं आपकी 70% करते हैं
11:33
इसलिए के मैं फिर अर्ज करता हूं कि जितनी
11:36
आप मैं कहता हूं दावे से कहता हूं आप मुझे
11:39
जितनी आप सहलत देते जाएंगे मैं कहता हूं
11:42
के उलमा इतने ही तालीम से होते चले जाएंगे
11:45
इनका कोई सवाल ही नहीं होगा
11:50
इसलिए हम एक बुनियादी बात है तब्लीग का
11:52
असल मकसद ही तालीम है उलमा के नफर का खुदा
11:55
की कसम असल मकसद ही तालीम के निजाम को वसत
12:00
मकसद ही सनी है निजाम तालीम को वसत देनी
12:03
है इसमें कोई हरकत है क्योंकि नफर का
12:06
रिश्ता तालीम के साथ से कहीं ज्यादा
12:08
ज्यादा बड़ा हुआ है। नफ़ का रिश्ता तालीम के
12:12
साथ से कहीं ज्यादा बड़ा हुआ है।
12:15
आपने एक आरिस परज़ के फ़ज़ाइल को जो महील कर
12:19
दिया और महदूस कर दिया।
12:21
उसका नुकसान ये हुआ। तो जहन इदाद अकायद का
12:25
फसाद उसकी वजह ये है। उसकी वजह असल है।
12:32
इसलिए हम अर्ज करते हैं। असल चीज इस पर
12:35
गौर किया गया नफर का जो असल मकसद था वो
12:38
तालीम है कुरान पढ़िए आप आपको साथ मिलेगा
12:46
इस आयत से मालूम होता है कि नफर का गहरा
12:48
रिश्ता तालीम के साथ है क्योंकि ये नबी
12:50
कीत का असल मकसद है तालीम आप खुद तालीम
12:55
और ये बात नहीं है के हमसे पूछेगा तो हम
12:57
मसला बतलाएंगे मैं कहता हूं आपसे साहिल से
12:59
साहिल से इल्म का छुपाना जितना हराम है
13:01
गैर साहिल से भी इल्म का छुपाना हराम है
13:05
जमाने इल्म साहिल से जमाने इल्म साहब
13:08
सिर्फ़ साहिल से नहीं
13:11
गैर साहिल से कतमाने इल्म भी इसी तरह
13:14
ताजिरे हुकूबत का सबब है जिस तरह साहिल से
13:18
इल्म को छुपाना हराम है। हम बहुत बड़ी बात
13:22
कर रहे हैं। आपसे खाली पूछते नहीं है। आप
13:24
कहते हैं पूछते नहीं हम क्या बताएं? आप ये
13:26
पूछिए हमसे आकर। नहीं मैं कहता हूं कि ये
13:29
ना नबूवत का मिजाज ना सहाबा का मिजाज। साफ़
13:33
उलमा का या ख़्याल के लोग हमसे पूछते नहीं
13:35
है। क्यों आपका ख्याल यह है कि लोग हमसे
13:37
पूछते नहीं है। आपकी जिम्मेदारी है कि आप
13:39
पूछने वाले तैयार कीजिए। ये सुन्नत है।
13:43
क्यों आप सल्लम हज़ मनास मनासु क्यों? आप
13:47
क्यों नहीं फरमा रहे? जिसे पूछना होगा वो
13:48
पूछ लेगा। मुस्तफ़ी पैदा करना मुफ़्ती के
13:51
जिम्मे है। मुस्तफ़ी पैदा करना मुफ़्ती के
13:55
जिम्मे है। मुफ़्ती के जिम्मे मुस्तफ़ी
13:56
तैयार करना। आस निकल कर शाख को हिलाया।
13:58
फिर हिलाया फिर हिलाया। मशहूर रिवायत है
14:00
पर उसके दरख्त के पत्ते झड़ने लगे फरमाया
14:02
मुझसे अनस पूछते क्यों नहीं हो मैं ऐसा
14:03
क्यों कर रहा हूं उछालते क्यों कर रहे हैं
14:04
आपने फरमाया के जब कोई अच्छी तरह वजू करके
14:06
अच्छी तरह पढ़ता है उसको ऐसे झड़ते हैं
14:08
सहाबी ने इस रिवायत को नकल करने के लिए
14:10
सिर्फ हदीस को नकल नहीं किया बल्कि बाद
14:12
वाले को बुलाकर लाए दरख्त के पास दरख्त की
14:14
टहनी को हिलाया हिला कर पत्ते जब झड़ने
14:16
लगे तो सवाल किया पूछते क्यों नहीं हो
14:18
क्यों कर रहे हो कि सारी बात आप माशा्लाह
14:20
रिवायत आप जानते हैं इस रिवायत से मालूम
14:21
होता है कि आप सल्ला वसल्लम के दर्जे
14:23
तालीम की सहाबा ने इस तरह हिफाजत की है
14:25
किसी रिवायत को नकल नहीं किया बल्कि
14:27
रिवायत के नकल करने में पूरा अमली तौर पर
14:30
दरख्त की टहनी हिला करी ने बाद वाले को
14:32
बतलाई कि देखो आज इस तरह किया था मैं भी
14:34
इस तरह कर रहा हूं मुस्तकी पैदा करो
14:38
मुस्तख मुस्तख तैयार करो हां।