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माज़ी का एतसाब यानी गुजरे हुए ज़माने में
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माज़ी में हमने क्या किया? हमारी इतनी
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ज़िंदगी गुज़र गई। हमारी इतनी उम्र गुज़र गई।
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इतना वक्त गुजर गया। तो हमने क्या किया?
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हमारी जिंदगी शरीयत के खिलाफ गुजरी। हमने
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इतनी इबादतें की। हमने अपना वक्त सही काम
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पर लगाया गलत काम पर। हमने कितना हराम और
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हलाल के दरमियान फर्क किया। मौत के बाद की
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जिंदगी के लिए हमने कितनी तैयारी की है
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इसका मुहासबा लेना चाहिए हिसाब लेना चाहिए
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रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने इरशाद
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के तुम अपनी जिंदगी का हिसाब लो इससे पहले
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कि तुम्हारा हिसाब लिया जाए यानी मौत से
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पहले हमें अपना हिसाब लेना चाहिए अपना
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मुहासबा करना चाहिए मौत का वक्त आ जाने पर
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किसी का कोई बहाना नहीं चलेगा जरा सा भी
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वक्त उसको ज्यादा नहीं दिया जाए।