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खुद एहतसाबी के बाद दूसरा काम जो हमें
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करना है वह है लाहाय अमल। यानी अमल को सही
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करने की तैयारी और उस पर मेहनत करने की
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कोशिश करना। अगर अपनी गलती को देखकर उसको
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सुधारने की कोशिश करें। उसको बदलने की
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कोशिश करें तो ये अपने ही लिए फायदेमंद
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होगा। रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
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ने इरशाद फरमाया अपनी जवानी को गमत समझो।
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कीमती समझो। बुढ़ापे आने से पहले अपनी
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सेहत को कीमती समझो। बीमारी आने से पहले
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अपने माल को गनीमत समझो फोफाका आने से
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पहले गरीबी आने से पहले अपने वक्त को
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गनीमत समझो मशगूरियत आने से पहले अपनी
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जिंदगी को गनीमत समझो मौत आने से पहले
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उलमा का कहना है कि अगर कोई इस हदीस पर
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अमल कर ले तो वो कामयाब हो जाए तो आइए
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दोस्तों हम गैर मुसलमानों का तरीका
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इख्तियार करने की बजाय अपने तरीके पर चले
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अपने नबी सल्लल्लाहु अलह वसल्लम बेटे को
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अपनाएं। सुन्नत को अपनाएं।