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आपने कहा कि किसी मजहबी किताब में
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डायनासोर का जिक्र नहीं है। अफसोस कि आज
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तक किसी मैथमेटिक्स के किताब में मुझे
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डायनासोर का जिक्र नहीं मिला।
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अस्सलाम वालेकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू।
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मोहतरम हजरात मजहब की किताबों में
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डायनासोर की बात क्यों नहीं की गई?
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हालांकि मजहबी किताब के अलावा साइंस की
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किताब और हिस्टोरिकल किताब में ऐतिहासिक
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किताब में डायनासोर की बात मिलती है। तो
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मजहब की किताब में डायनेसर का कोई भी तजरा
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क्यों नहीं है? तो इसका जवाब हजरत मुफ्ती
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शमाइल नदवी साहब ने खूब बेहतरीन अंदाज से
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दिया है। बहुत ही दिलचस्प है। आइए सुनते
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हैं। आपने कहा कि किसी मजहबी किताब में
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डायनासोर का जिक्र नहीं है। अफसोस कि आज
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तक किसी मैथमेटिक्स के किताब में मुझे
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डायनासोर का जिक्र नहीं मिला।
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तो इसका मतलब मैथमेटिक्स की किताब बेकार
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है। नहीं उसका वो टॉपिक नहीं है। रेवेलेशन
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का और मजहबी किताबों का टॉपिक ये नहीं है
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कि आपको आके बताएं साइकिल कैसे बनाते हैं
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या आकर ये बताएं कि जो है डायनासोर कब था।
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वो तो मोरालिटी सिखाने आया है। गॉड के
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बारे में बताने आया। नॉन फिजिकल रियलिटी
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की हकीकत को सिखाने के लिए आया। रिलीजियन
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साइंस को रोकता है। नहीं रोकता। अगर रोकता
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है तो गलत करता है। रिलीजन साइंटिज्म को
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रोकता है जिसमें हमारे जावे साहब मुख्तल
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साइंस और साइंटिज्म में फर्क है।
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साइंटिज्म ये है कि आप समझे कि साइंस और
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साइंटिफिक मेथोडोलॉजी ये नॉलेज को हासिल
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करने का वाहिद सोर्स ऑफ नॉलेज है। ये है
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साइंटिज्म। हम इसे रिजेक्ट करते हैं। हम
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साइंस को तो तरक्की करते हैं। भाई आप
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हमारी पूरी तारीख कर लें। पढ़ लें तो आपको
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पता चल जाएगा। बहरहाल ये अलग टॉपिक है।