The Epic Delhi Debate: Atheism vs Religion | Mufti Shamail Nadvi vs Javed Akhtar 20 December Delhi
Dec 20, 2025
Khuda Ke Wujood Par Delhi Mein Grand Munazra | Mufti Shamail Abdullah Nadvi vs Javed Akhtar
खुदा के अस्तित्व पर दिल्ली में बड़ा मुनाज़रा | मुफ़्ती शमाइल अब्दुल्लाह नदवी vs जावेद अख्तर।
খোদার অস্তিত্ব নিয়ে দিল্লিতে বড় মুনাজারা | মুফতি শামাইল আবদুল্লাহ নদভী বনাম জাভেদ আখতার।
خدا کے وجود پر دہلی میں بڑا مناظرہ | مفتی شمائل عبداللہ ندوی بمقابلہ جاوید اختر۔
A Massive Debate in Delhi on God’s Existence | Mufti Shamail Abdullah Nadvi vs Javed Akhtar.
Religion vs Atheism Debate | Mufti Shamail Nadvi vs Javed Akhtar Debate 20 December in Delhi #debate
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Note:
This video is made only for informational / educational purposes.
The content used in this video belongs to its respective owner.
Credit:
[Mufti Shamail Nadwi]
Original Video: https://www.youtube.com/live/pythOMyPcHw?si=YPX9dmORKKwB_vfx
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📝 Description (4 Languages)
🔶 Hindi
दिल्ली में 20 दिसंबर को खुदा के अस्तित्व पर एक ऐतिहासिक मुनाज़रा हुआ है।
इस इल्मी मुनाज़रा में मुफ़्ती शमाइल अब्दुल्लाह नदवी और जावेद अख्तर आमने-सामने हैं।
🔶 Urdu
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0:00
की बात की इस पर मैं बात कर सकता हूं
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लेकिन आज नहीं करूंगा क्योंकि वक्त कम है
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कभी और इस पर डिस्कस करेंगे मैं तैयार हूं
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उस पर भी बात करने के लिए अभी से राउंड टू
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की भूमिका तय हो रही है डस गॉड एक्सिस्ट
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राउंड टू
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आज गॉड के एक्सिस्टेंस पे बात है तो मैं
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उसी के रिलेटेड जो है आपके सवालात को
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एंटरटेन भी करूंगा और मैं भी पूछूंगा।
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आपने कहा कि आपने साबित ही नहीं किया जबकि
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आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी बुनियादी
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आर्गुमेंट है।
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आप मुझे कॉन्टिंजेंसी का मतलब बताइए। आपका
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मर्तब क्या है? कंटिंजेंसी?
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कॉन्टिंजेंसी का मतलब यह हुआ के हर वो
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वजूद जो किसी भी चीज का पाबंद है। हर वो
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वजूद या हर वो चीज जो अपने एकिस्टेंस में
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किसी भी चीज के पाबंद है और उससे बाउंड
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है। उसको उसकी जरूरत है। उस पर डिपेंड
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करती है। तो जाहिर सी बात है कि उसका कोई
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ना कोई कॉज होता है। ये तो अक्ल की बात
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है। ये आप रीजनिंग की बात करते हैं। मैं
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वही कर रहा हूं। दूसरी चीज आपने ये बात
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कही के
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इतने बिलियन लाइट इयर्स दूर है उसका मेरा
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क्या लेना देना फिर मेरे ख्याल से आपको ये
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नहीं कहना चाहिए आई एम आई थिंक देयर फॉर
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आई एम एन एथिस्ट आपको सोचना चाहिए सिर्फ
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आप एक लिमिटेड दायरे में रहकर नहीं सोचे
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बल्कि बाहर निकल कर सोचें| आपने तीसरा
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सवाल किया आपने दो तीन सवाल एक साथ
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ऐसी बातें ना कीजिए कुछ लोगों को ऐतराज हो
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जाएगा आप पे कि आप कुछ भी सोचे ये इजाजत
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आपको है नहीं
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मुझे है
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[प्रशंसा]
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जी आप आपने प्रॉब्लम ऑफ इविल के ताल्लुक
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से सवाल किया और बार-बार आप एक लफ्ज रिपीट
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कर रहे हैं के ओमनीपोटेंट गॉड है। ऑल
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पावरफुल गॉड है। यही तो दर असल समझना है
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कि गॉड का कांसेप्ट क्या है? प्रॉब्लम ऑफ
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इविल जो है प्रॉब्लम ऑफ इविल दर हकीकत दो
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असमशन पर कायम है। अगर आप इन दो असमशन को
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समझ जाएं तो ये प्रॉब्लम प्रॉब्लम नहीं
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रहेगी। ये आर्गुमेंट आपको समझ में आ जाएगी
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कि ये कोलैप्स कर जाता है। पॉइंट नंबर वन
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यानी जो आपका सबसे पहला फॉल्स असमशन है कि
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गॉड मर्सफुल है, ओमनीपोटेंट है। दुनिया
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में जुल्म हो रहा है। लेकिन आपको ये समझना
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चाहिए कि हमारे वर्ल्ड व्यू के मुताबिक
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गॉड सिर्फ ओमनीपोटेंट और सिर्फ मर्सफुल
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नहीं है बल्कि वो ऑल वाइज भी है और वो ऑल
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नोइंग भी है। उसके हर काम के पीछे हिकमत
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और विज़डम है। ये कोई जरूरी नहीं है कि वो
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हिकमत और विज़डम आपको समझ में आए या मुझे
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समझ में आए। अगर आप जो समझ रहे हैं उसके
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मुताबिक आप फैसला कर रहे हैं ये लिमिटेड
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पर्सपेक्टिव से आर्गुमेंट है और इस चीज को
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हम अपनी दुनिया में अपने लाइफ में डेली
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लाइफ में इस प्रिंसिपल को एक्सेप्ट करते
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हैं। हम जब किसी डॉक्टर के पास जाते हैं
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डॉक्टर के पास जाकर वो अगर उसने हमें कोई
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दवाई दी है तो हम ये तो नहीं कहते कि जब
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तक आपके पास जितना नॉलेज और जितना विज़डम
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नहीं है आपने क्यों ये दवाई दी है तब तक
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हम इस चीज को एक्सेप्ट नहीं करेंगे। नहीं
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कहते हम उसकी अथॉरिटी को तस्लीम करते हैं।
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क्यों? क्योंकि उसकी हम जानते हैं कि वो
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नॉलेजेबल है। वो विज़डम वाला है। हमसे
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ज्यादा नॉलेज और हमसे ज्यादा विज़डम है।
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बताएं सर।
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नहीं नहीं डॉक्टर में खुदा में बड़ा से
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डॉक्टर पढ़ा लिखा होता है। एक तो मैं उसकी
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बात सुनूंगा।
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दो ये नहीं कुछ जवाब तो ये भी नहीं है।
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सर प्लीज आ जाइए। अगर सब ऑडियंस से बोलने
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लगेंगे तो फिर मतलब नहीं मतलब आप यह कहें
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कि क्योंकि आप डॉक्टर पे बिलीव करते हैं
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इसलिए खुदा पे बिलीव की क्या
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यह मिसाल आपको समझाने के लिए
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आर्गुमेंट है इस पे आपको एतराज नहीं है तो
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सिंपल बात ये है कि मैं अगर ये यकीन कर
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रहा हूं कि एक ओमनी परसेंट उसकी मसलहत है
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ये जो बच्चे मर रहे हैं ये मसलहत है उसकी
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मुझे नहीं चाहिए थी मसलहत
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उसकी मसलहत नहीं तो समझना है
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मतलब एक्सपीरियंस।
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अच्छा
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इस आपने अभी मेरी बात पूरी सुनी नहीं।
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मैंने कहा आपका पूरा आर्गुममेंट दो फॉल्स
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असंप्शनंस पर है। एक फॉल्स असंप्शन मैंने
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बता दिया। दूसरा फॉल्स असंप्शन ये है कि
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इस दुनिया में इविल के होने का कोई गुड
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रीज़न नहीं है। जबकि हमारे पास बाज रीज़ंस
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मौजूद हैं। हमारे पास बाज वजूहात मौजूद
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हैं। अगर इस दुनिया में इविल ना हो, तो आप
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गुड को डिफाइन कैसे करेंगे? अगर जुल्म ना
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हो, आप इंसाफ को समझेंगे कैसे? अगर तारीकी
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ना हो, तो आप लाइट को समझेंगे कैसे?
4:01
बहुत अच्छे
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अभी और सुन ले अभी और बाकी है। ये तो बात
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बहुत पसंद आई साहब मुझे के जब तक रेप ना
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हो तब तक औरतों की इज्जत का ख्याल आप
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आपने मेरा जवाब पूरा सुना ही नहीं
4:11
जब तक के बच्चों का कत्ल ना किया जाए तब
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तक आपको बच्चों की मासूमियत की इज्जत
4:16
आपने पूरा जवाब सुना ही नहीं
4:17
क्या बात है क्या आपने नुक्ता निकाला हुआ
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है
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आपने पूरा जवाब सुना ही नहीं आप सुन लें
4:21
मेरी बात सुन लें ये मैंने आपको एक चीज
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बताई दूसरी चीज इस दुनिया में हम आए हैं
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टेस्ट के लिए हमारा टेस्ट हो रहा है और हर
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इंसान का अलग-अलग अंदाज में टेस्ट होता है
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और इस दुनिया में अगर इविल मौजूद है तो वो
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इविल जरिया है हमारे अंदर ह्यूमन नोबल
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क्वालिटीज को डेवलप करने का और अलग-अलग
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फील्ड में प्रोग्रेस करने का और अगर हमारे
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अंदर और इस दुनिया में इविल नहीं होता तो
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बताइए टेस्ट का मतलब क्या होता अगर मैं
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अपने स्टूडेंट को एमसीक्यूस दूं और उसमें
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सिर्फ राइट आंसर लिख कर दे दूं और कहूं
4:51
तुम्हारा टेस्ट हो गया ये मीनिंगलेस है।
4:53
इस दुनिया में अगर हम टेस्ट के लिए आए हैं
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तो जाहिर है गुड एंड इविल दोनों मौजूद है।
5:00
तो अगर गुड एंड इविल दोनों मौजूद है तो ये
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इवल भी खुदा का बनाया हुआ है।
5:05
जी हां खुदा का बनाया हुआ है। लेकिन
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अच्छा चलो अच्छी बात है।
5:08
जी बिल्कुल।
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तो अभी अभी तो ये है कि जो मेजॉरिटी
5:13
है दुनिया में वो इवल है। तो ये खुदा
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एक्चुअली इवल के साइड पे लग रहा है मुझे।
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मेजोरिटी में तो वो है।
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क्या बात कर रहे हैं भाई आप? कोई भी जो
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मुंसिफ होगा चाहे आपका अपना घर हो जिसके
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आप सबसे बड़े हैं चाहे आपकी ऑर्गेनाइजेशन
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हो जो आप चलाते हैं वहां पर आप इवल रखेंगे
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साबित करने को कि बाकी लोग शरीफ है
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मेरी बात सुनिए
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क्या ये आर्गुममेंट ही गलत है कि जब तक के
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कोई इवल नहीं होगा तब तक कि शरीफ आदमी
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शरीफ नहीं लगेगा
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अगर एग्जामिनर इ गलत ऑप्शन दे रहा है तो
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एग्जामिनर इविल नहीं हो गया जो गलत ऑप्शन
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को सेलेक्ट कर रहा है वो फेल होगा क्रिएटर
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ने इविल को बनाया है लेकिन वो इविल नहीं
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है
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अच्छा अच्छा सुनिए मेरी बात लेट मी
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कंप्लीट सर लेट मी कंप्लीट सर क्रिएटर ने
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इविल को बनाया है टेस्ट के लिए वो इविल
6:01
नहीं है इविल वो होगा वो होगा जो उसे
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इख्तियार करेगा छुरी को बनाने वाला गलत
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नहीं होता है छुरी का गलत इस्तेमाल करने
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वाला गलत होता है
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रेप को कैसे गलत इस्तेमाल करते हैं
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रेप इंसान के फ्री विल का नतीजा है ये
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माइक
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ये रेप कैसे गलत इस्तेमाल होता है अब सुन
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लें। अब सुन ले
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हां मैं बता रहा हूं।
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मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं कि जो
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इविल इस दुनिया में मौजूद है उसके कई सारे
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तरीके हैं। एक तरीका इंसान का अपना फ्री
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विल है। अब अगर कोई रेपिस रेप कर रहा है
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तो इसका गॉड का कसूर नहीं है। वो अपने
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फ्री विल का गलत इस्तेमाल करना कर रहा है।
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उसको सजा मिलनी चाहिए। और उसी के लिए
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जहन्नुम बनाई गई है।
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यह फ्री विल का भी बड़ा चक्कर है। आप
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कोई बुरा काम करते हैं या कोई बुराई होती
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है तो ये कहा जाता है कि ये फ्री विल है।
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7 बिलियन फ्री विल्स आर मूविंग ऑन दिस
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प्लनेट। 7 बिलियन फ्री विल। और एक आदमी
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अपनी फ्री विल से मुझे कत्ल कर दे तो मैं
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खुदा की मर्जी से मरा हूं। क्या इसकी फ्री
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विल की वजह से? मेरी मौत खुदा के हाथ है
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या इस फ्री विल वाले के हाथ है।
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खुदा ने फ्री विल का निजाम बनाया है और उस
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निजाम का गलत इस्तेमाल करके कोई आपको मार
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रहा है।
7:17
इस्तेमाल करके मेरा कत्ल कर देता है। मेरी
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मौत का जिम्मेदार कौन है?
7:21
वो इंसान जिम्मेदार है।
7:22
वो इंसान तो ये कहना कि
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और उसको उसको उसको सजा मिलेगी।
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तो अब आप आगे चलिए कि ये तय करना कि
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अल्लाह ही या खुदा सॉरी अल्लाह नहीं। खुदा
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ही जिंदगी देता है और खुदा ही मौत देता
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है। ये गलत है।
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बिल्कुल गलत नहीं है।
7:36
हां नहीं।
7:36
निजाम उसी ने बनाया फ्री विल का। निजाम
7:39
मौत और हयात का उसी ने बनाया।
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कंट्राडिक्टिंग योरसेल्फ। अभी आपने कहा कि
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एक आदमी ने फ्री विल से आपको मार दिया।
7:46
इसमें उसे फ्री विल दी गई थी। उसने गलत
7:48
इस्तेमाल किया। 7 बिलियन फ्री विल्स आर
7:52
मूविंग ऑन दिस प्लेनेट। और आप चाह रहे हैं
7:54
कि मैं सिर्फ खुदा का ध्यान करूं। ये 7
7:56
बिलियन फ्री विल्स को मुझे लुक आफ्टर करना
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पड़ेगा कि नहीं? ये तो तबायां कर रही हैं।
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और तबाहियां ज्यादा हो रही है।
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बिल्कुल। तो अगर आप बताएं, आप बताएं अगर
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खुदा नहीं है फॉर एग्जांपल। तो आप इविल को
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कैसे डिसाइड करेंगे? यानी हाउ कैन यू
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डिफाइन इविल ऑब्जेक्टिवली विदाउट गॉड?
8:15
इविल को डिफाइन।
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देखिए दुनिया में दो तरह के जानवर है। एक
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जो अकेले रहते हैं जंगल में और एक जो
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ग्रुप्स में रहते हैं।
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ग्रुप में जो भी रहेगा चाहे वो आपका
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फाउंडेशन हो चाहे कोई क्लब हो, चाहे कोई
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पॉलिटिकल पार्टी हो, चाहे कोई यूनिट हो,
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उसमें आपको इंटेलेक्ट करने के रूल बनाने
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पड़ेंगे।
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यानी लोग तय करेंगे।
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लोग तय करेंगे। अगर लोगों ने यह तय किया
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कि किसी का रेप करना सही है आप जस्टिफाई
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करेंगे।
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नहीं
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आपका फाउंडेशन तो यह हो गया ना कि लोग ई
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विल डिसाइड करेंगे।
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नहीं नहीं अरे दुनिया में ऐसे ग्रुप्स हैं
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जो रेप को जायज मानते हैं सर्टेन हालात
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में। मैं डिटेल में नहीं जानूंगा। आप भी
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जानते हैं। ये जो आईिस वाले थे जिन्होंने
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क्या किया था? तो
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उन्होंने क्या किया? उसका खुदा से कोई
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ताल्लुक नहीं है सर। मैंने सिंपल सवाल
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किया कि इविल को आप डिफाइन करते कैसे हैं?
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आइए वापस आइए।
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जी
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आप साथ में तभी रह सकते हैं जब कुछ आप ऐसे
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उसूल डेवलप करें जिसमें हर एक का बेसिक
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तहफुल हर एक का बेसिक राइट हो और हर एक को
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कोई आराम मिले। यही तरीका है किसी भी
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ऑर्गेनाइजेशन जिसमें एक से ज्यादा लोग हैं
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और वो ऐसे चलती है जिंदगी में। उसमें अगर
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आप गड़बड़ करेंगे तो तबाही होगी, नुकसान
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होगा, बर्बादियां आएंगी। और अगर उसमें आप
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घर ले लीजिए ना एक हस्बैंड है, एक वाइफ
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है, बच्चे हैं, वालिदा भी हैं, दो बहनें
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भी है, एक भाई भी है। अब इसमें कोई निजाम
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आपको चाहिए साथ में रहने का। और एक दूसरे
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पे भरोसा रहे। एक दूसरे के भाई ख्वाह हो,
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एक दूसरे की मदद करें। ऐसी जिंदगी
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सर आपकी बात आ गई। आप ये कह रहे हैं कि
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लोग डिसाइड करेंगे क्या सही है क्या गलत
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है। यही है मेजॉरिटी डिसाइड करेगी क्या
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सही है क्या गलत है। अरे भाई बिल्कुल
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मेजोरिटी अगर ये कहे कि नाज़ी जर्मनी के
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साथ जिस तरह मेजॉरिटी थी कि जेनोसाइड करना
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सही है आप जस्टिफाई करेंगे
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उस वक्त उस वक्त
10:16
आपका आपका ये
10:17
सवाल सिर्फ उसके बाद क्लोज
10:18
हां उस वक्त प्लेनेट पे जो लोग थे उनमें
10:22
कितने लोग हिटर को सही समझते
10:24
अच्छा प्लनेट की मेजॉरिटी तय करी सोसाइटी
10:26
की नहीं प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड के
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एक्सिस्टेंस को सही मानती है आप क्यों
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नहीं मानते
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ये
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हेलो हेलो हेलो ये क्रॉस क्वेश्चन का
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राउंड यहां पर समाप्त होता है और ये बड़ा
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अच्छा है कि इस तरह से फ्रेगमेंट कर दिया
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गया है ताकि जो मरकरी ऊपर जा रहा है नीचे

