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ज़हर का वक्त ज़वाल यानी सूरज के ढलने से
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शुरू होता है। अब यह ज़वाल या सूरज का ढलना
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क्या है? उसे समझते हैं। हम जानते हैं कि
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सूरज पूरब से निकलता है। पश्चिम की तरफ
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डूबता है। अब यह निकलने और डूबने तक जितना
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वक्त है इस पूरे वक्त को अगर हम दो
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हिस्सों में बांटें तो बीच का जो वक्त है
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उसको नस्हार यानी दिन का बीच वाला हिस्सा
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या इस्तवा शमस कहा जाता है। इसी के थोड़ी
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देर बाद जब सूरज पश्चिम की तरफ थोड़ा सा
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आगे बढ़ जाता है। इसे ही ज़वाल कहते हैं।
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यानी सूरज का ढलना कहते हैं। और इसी से
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जोहर का वक्त शुरू होता