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कि अगर गॉड है तो इविल क्यों एक्सिस्ट
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करता है? जबकि मैं कहता हूं
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अगर खुदा मौजूद है तो शैतान क्यों? शैतान
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की क्या जरूरत है? अगर गॉड मौजूद है तो
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इविल एकिस्ट क्यों करता है? आइए इसका जवाब
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सुनते हैं। हजरत मुफ्ती शामाइल नदवी की
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दूसरी चीज हमारे जावेद अख्तर साहब जरूर
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गॉड ऑफ गैप्स की मिसाल भी जरूर देंगे। और
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मिसाल देंगे कि पहले जमाने में बिजलियां
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कड़कती थी तो लोगों ने किसी एक खुदा की
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तरफ और बारिश होती थी तो दूसरे खुदा की
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तरफ मंसूब कर दिया। उनके पास दलील नहीं
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थी। ये हमारा वर्ल्ड व्यू है ही नहीं। ये
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हमारा वर्ल्ड व्यू है ही नहीं। क्योंकि
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नेचुरल फेनोमिना के प्रोसेस की
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इंटरप्रिटेशन को जान लेने से ये कहां से
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साबित हो गया कि गॉड एक्सिस्ट नहीं करता
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है। इस पर मैं इंशाल्लाह अभी आगे बात
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करूंगा। आप हजरात यह भी देखेंगे और मैं यह
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एक्सपेक्ट करता हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड
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जनाब जावेद अख्तर साहब जरूर इमोशनल
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आर्गुमेंट्स भी देंगे जो कि एक लॉजिकल
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फैलेसी है जब बात आती है ट्रुथ को डिसाइड
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करने में। क्यों? मिसाल के तौर पर वो
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कहेंगे कि अगर गॉड है तो इविल क्यों
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एक्सिस्ट करता है? जबकि मैं कहता हूं इविल
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का एक्सिस्ट करना गॉड के एग्जिस्ट
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एग्जिस्ट करने की दलील है उसके खिलाफ नहीं
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है। चूंकि अगर गॉड है तो हम सब उसके सामने
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अकाउंटेबल हैं। और अगर हम अकाउंटेबल हैं
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तो अकाउंटेबिलिटी के लिए इविल का मौजूद
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होना जरूरी है। उसके बगैर हम अकाउंटेबल
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नहीं हो सकते। और अगर हम अकाउंटेबल नहीं
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हैं तो हम जनाब जावेद अख्तर साहब से
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पूछेंगे कि आप बताएं कि फिर सफरिंग इस
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दुनिया में क्यों है? अगर खुदा नहीं है तो
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सफरिंग क्यों है? और उन लोगों के जज्बे का
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क्या जिनके अंदर सफरिंग के के बाद इंतकाम
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लेने का जज्बा पाया जाता है और वो इस
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दुनिया से ऐसे ही चले गए। क्या उनकी सारी
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तकलीफें बेकार चली जाएंगी? अब आ जाएं उसी
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एग्जांपल की तरफ के बॉल मुझसे अगर कोई
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पूछे इस बॉल को किसने बनाया और या इस
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एक्सपेंडेड बॉल को किसने बनाया? मैं
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कहूंगा कि चूंकि ये यूनिवर्स और इस
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यूनिवर्स की तमाम चीजें कॉन्टिंजेंट हैं।
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कॉन्टिंजेंट होने का मतलब ये होता है कि
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जो अपने एक्सिस्टेंस पे किसी के ऊपर
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डिपेंड करती हो। तो जाहिर है ये यूनिवर्स
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कॉनंटिंजेंट है। और अगर कोई चीज
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कॉनंटिंजेंट नहीं है तो मैं रिक्वेस्ट
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करूंगा कि मुझे दिखा दें कि कौन सी चीज
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यूनिवर्स में कंटिंजेंट नहीं है। हम भी
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जरा गौर कर लें और हम भी देख लें। और जब
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कंटिंजेंट चीजें मौजूद हैं तो फिलॉसोफर्स
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की इस्तिलाह के मुताबिक हम उस टर्मिनोलॉजी
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के मुताबिक हम उस जगह तक पहुंचते हैं और
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उस हस्ती तक पहुंचते हैं जिसे नेसेसरी
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बीइंग कहा जाता है कि ये वो नेसेसरी बीइंग
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है जिसका मौजूद ना होना नामुमकिन हो चूंकि
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अगर ये मौजूद ना हो तो सारी चीजें
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एक्सिस्टेंस में आएंगी ही नहीं और ये सारी
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डिपेंड ये कंटिंजेंट चीजें उसी के ऊपर